गुना / प्रदेश में पहली बार आंगनवाड़ी केंधों पर पुरुष अपने हाथों से भोजन तैयार कर कु पोषित बच्चों को खिलाते नजर आएंगे। पुरुष यह भी संदेश देंगे कि बच्चों को भोजन खिलाने की जिम्मेदारी महिलाओं की नहीं पुरुषों को भी है। गुना जिले के आदिवासी क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंधों पर इस 8 मार्च से पोषण पखवाड़ा में पुरुष जागरूक करते नजर आएंगे। महिला एंव बाल विकास विभाग के डीपीओ ने इसकी तैयारी भी कर ली है। आदिवासी क्षेत्रों के गांवों में जनजागरूकता अभियान की जिम्मेदारी भी अफसरों ने अपने ली है। इसके तहत प्रभातफेरी निकाली जाएगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसर अब जिले में कु पोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए पोषण पखवाड़े में पुरुषों की भूमिका तय करने में जुटे हैं। पोषण अभियान में 1660 आंगनवाड़ी केंधों पर इस अभियान को चलाया जाएगा। डीपीओ डीएस जादौन ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों महिलाओं को बच्चों के भोजन की जिम्मेदारी दी जाती है। लेकि न इस बार पुरुष भी बच्चों को संभालते नजर आएंगे। परिवार चलाने में महिला और पुरुष की बराबर जिम्मेदारी होती है। इसको लेकर जिले में पहली बार पहल की जाएगी।
आंगनवाड़ी केंधों पर भोजन बनाएंगे कर्मचारी :
महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसर और कर्मचारी भी पोषण पखवाड़े में चूल्हे पर भोजन तैयार करते नजर आएंगे। वह भी जागरूकता अभियान के तहत यह बताएंगे कि अपने बच्चों को ध्यान महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रखे। बमोरी क्षेत्र में इसकी पहल की जाएगी। सबसे अहम बात तो यह है कि 1660 आंगनवाड़ी केंधों पर महिलाओं के साथ पुरुष भी प्रभातफे री निकालते नजर आएंगे।
रूटचार्ट कि या तैयारः
पोषण अहार पखवाड़े के तहत कलेक्ट्रेट में महिला एवं बाल विकास विभाग के डीपीओ ने विभागीय कर्मचारियों की बैठक लेकर दिशा निर्देश दिए हैं कि वह इस अभियान में पुरुषों की सहभागिता तय करें। ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग के अफसरों को पोषण पखवाड़े को लेकर सबसे अधिक ध्यान है। डीपीओ ने बताया कि आंगनवाड़ी केंधों पर पहली बार पुरुष पोषित अहार अपने बच्चों को भी खिलाते नजर आएंगे।